जानिए, क्या है रक्षाबंधन और क्यों मनाया जाता है ये -2020

राखी

हर साल रक्षाबंधन अलग- अलग तारिक को आता है साथ ही बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है और अपने रक्षा का वचन लेती है.लेकिन क्या आप जानते है रक्षा बंधन  क्यों मनाया जाता है? और इसके पीछे क्या कारण है.

रक्षाबंधन कब आता है ?

रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन धूम-धाम से मनाया जाता है.इस साल 2020 में यह पर्व 3 अगस्त को मनाया जाएगा. इस साल कोरोना वायरस के कहर की वजह से राखी का त्यौहार बहुत फीका होने की संभावना है क्युकी lockdown की वजह से भाई-बहन एक दूसरे के पास पहुंचने में असमर्थ है.लेकिन कहते है न हर काली रात के बाद उजाला जरूर होता है।

ठीक इसी प्रकार रक्षाबंधन से जुडी पौराणिक कथा भी है जहाँ हर कोई परेशान था सैतानी शक्ति से और अंत में वीजय होती है.

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सदियों से चली आ रही रीती के अनुसार बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधकर दोनों के सकुशल रहने की कामना करती है शायद ही आप सबको पता होगा की पहले भाई को राखी बांधने से पहले लोग नीम के पेड़ और तुलसी को राखी बांध प्रकृति की सुरक्षा की कामना करते है. जिसका प्रचलन आजकल बहुत काम हो गया है.

पौराणिक  मान्यताओ के अनुसार:

रक्षाबंधन क्यों और कब से मनाया जाने लगा इसपर तो कई कहानिया है. लेकिन आज हम आपको कुछ प्रचलित कहानिया बतायेंगे

भगवान् और दैत्यों के बिच युद्ध में विजय

भविष्यपुराण के अनुसार एक बार भगवान् इंद्र और दैत्यों के बिच युद्ध छिड़ गया था. बलि नाम के दैत्य ने इंद्रदेव  को हरा के अमरावती पर कब्ज़ा कर लिया था.

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तब भगवान् इंद्र की पत्नी सची मद्द्त के लिए भगवान् विष्णु के पास गयी तब भगवान् विष्णु ने सची को सूती धागे से हाथ में पहना जाने वाला एक वलय बना के दिया और इंद्रदेव के हाथ में बाँधने के लिए दिया।

सची ने ऐसा ही किया साथ ही इंद्रदेव की सफलता और सुरक्षा की कामना की.जिसके बाद भगवान् इंद्र ने बलि को हरा के अमरावती पर अपना अधिकार जमा लिया।

 द्रौपती ने कृष्ण को बंधी थी राखी

मान्यताओ के अनुसार एक बार श्री कृष्ण को हाथ में चोट लग गयी थी तब द्रौपती ने कृष्ण को अपने साड़ी फाड़ कर उनके हाथो में बंधी थी साथ ही कृष्ण  भविष्य  में आने वाले हर मुसीबत से उनकी रक्षा करने का वचन दिया था ,कृष्ण ने महाभारत के समय द्रौपती की रक्षा की थी वस्त्र हरण से.

चितौड़ की रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ

ऐसा माना  जाता है की चितौड़ की रानी कर्णावती ने सम्राट हुमायूँ को राखी भिजवाते हुए बहादुर शाह से रक्षा मांगी थी जो उनका राज्य हड़प रहा था. अलग धर्म होने के वावजूद हुमायूँ  ने रक्षा का वचन दिया.