दहेज एक नीच प्रथा😐

  • ये कोई कहानी नही हक़ीक़त है,अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे और ज्यादा से ज्यादा SHARE भी करे😑 ये  पढ़ने के बाद शायद किसी की आँखों पर लगी फरेब की झूठी पट्टी खुल जाए ।।

 

हाल ही में रिया का रिश्ता तय हुआ,2 लाख की लेन देन के साथ,परिवार वाले बहुत खुश थे,दो दिन बाद लड़के वालों के यहाँ सगुन देने जाना था ,सब कुछ ठीक ठाक से चल रहा था ।

दो दिन बाद जब रिया के परिवार वाले तैयार होकर घर से निकल गए सगुन का समान लेकर,आधे रास्ते ही पहुचे थे कि फ़ोन की घंटी बज उठी ….दूसरी तरफ से लडके का पिता बात कर रहा था आज सगुन लेकर ना आये हम अपने लड़के की शादी आपकी लड़की से नहीं करेंगे,लड़की वालों की तो जैसे जान अटक गई ।।

लडके के पिता से उन्होंने कहा बात क्या हो गयी पैसो की बात है तो 2-4लाख ओर ले लो,होने वाले समधी जी ने बड़ी ही बेशर्मी के साथ कहा कि फ़लाने 15लाख दके रहे है,लड़की वालों की बोलती बंद हो गयी उन्हें समझ नही आ रहा था इतना रुपया लाए कहा से,आधे रास्ते से बिना कुछ कहे-सुने वो घर वापस आ गए,लेकिन किसलिए ??

क्या उन्होंने सही किया ??वे लड़के के घर इसलिए नही गए कि अब वह जाने से उनकी ही बेज्जती होगी ?लेकिन क्या ये सही है बेज्जत लडके वाले होते या लड़की वाले ??

♂ अपने कलेजे के टुकड़े को जो ऐसे लालची हाथो में सौपने जा रहा था

♂ दहेज के भूखो की इतनी इज्जत दे रहा था

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इज्जत तब भी रिया के पिता की उतरती?

 

comment karke jarur btaye riya ke pita ko kya karna chahiye tha (मेरे हिसाब से पुलिस कंप्लेन करके ही वापस घर आना चाहिए था),or is post ko jaada se jaada share bhi kariye taki un logo tak ye post pahuch sake jo apne aap ko BHAGWAAN mante hai ,Dahej maangte time khud ko bahut ijjat daar samjhte hai 😣😠

 

Truth Of Our Society…..कही तो लोगो को कितना भी मिल जाए फिर भी ये नही मिला वो नही मिला कि धुन खत्म नही करते,शायद ओ भूल जाते है कुछ समानो से उनका घर तो भर जाता है

 

♂लेकिन वही समान जुटाने में एक पिता की जीवन भर की पूंजी लगी होती है

 

♂एक पिता अपने ही कमाई से अपने सपने ना पूरा करके अपने बच्चियों के “दहेज़” का इंतजाम करता हैं

 

♂उसे कार,घर लेना होता है,लेकिन ये सोच कर अपने मन को संतुष्ट करता है कि मेरी तो उम्र हो गयी अब ये पैसे अपने बच्चियों को दहेज में दूंगा,ताकि ससुराल में उन्हें सम्मान मिले,कोई कुछ कहे ना

 

♂जब अपने ही पिता के जीवन भर की जमा-पूंजी लगने के बाद भी ससुराल वालों को किसी न किसी चीज की कमी लगती है तब …..

 

कही न कही उनके प्रति घृणा का भाव जीवन भर के लिए घर कर जाता है “आने वाली पीढ़ी की सोच बदलेगी तभी कुछ हो सकता है”

 

सच तो ए ही है जब तक आज के युवा पीढ़ी “दहेज” लेने से मना नही करेंगे तब तक ये कारोबार मुफ्त में चलता रहेगा।।

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छोटे बच्चो में भी आज कल यही देखने को मिलता है जब मेरी शादी होगी तब मैं अपने ससुर से ये लूँगा ओ लूँगा …यहां गलती किसकी समझ नही आता परिवार के सोच की या समाज की ।।

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Posted by Anjali Pandey

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9 thoughts on “दहेज एक नीच प्रथा😐”

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