पीरियड्स की चिंता दूर करेगा अब ये नया तरीका पैड को बोल दे टाटा बाई-बाई

हेलो दोस्तो,

आज का जो विषय है वो लड़कियों से जुड़ा है,हालांकि पहले इस विषय मे लडकिया किसी से भी बात नही करती थी ,उन्हें जो घर की औरतें बताती बस वो वही करती,अधिकतर बाते उनकी माँ को भी उनकी नानी या मामी ने बताया होगा. जिस वजह से वो सही निर्णय नही ले पाती साथ ही दर्द झेलती सबका मानना होता है ये एक स्वभाविक चीज है जो वर्षो से चली आ रही है.

कुछ लोग तो मासिक धर्म को एक रोग समझते है,जिसके चलते आज भी कई गाँव, शहर में लड़कियां चैन की साँस नही ले पाती महीने के 5 दिन