26 जनवरी

2
1295

कभी सोचा न था ऐसा दिन भी आएगा

सड़को पर लाखों भिक्षुक,होटल में

बचपन रूठता जाएगा

सरहद पर जवानी मर मिटेयँगे

हर घर मे झूठी शान  बिखरेंगे

कही गोलियों से कोई भुने जाएंगे

कही गौरव का जश्न मनाया जाएगा

कही भुखमरी,बालश्रम बढ़ता जाएगा

कही डोनेशन उनके नाम पर लिया जाएगा

सोच न था ऐसा दिन भी आएगा

बचपन बाहों में दम तोड़ेंगी

हर तरफ मार काट होगा

फिर भी झूठी शान के खातिर

“तिरंगा” लहरायेंगे

हमारा देश महान है,हर “जुर्म ” को छोड़कर

एंटरटेनमेंट के पीछे करते बवाल है

 

 

 

 

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here